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फसाना ए बेचैन जिंदगी

                
                                                         
                            छोड़ कर तन्हा हमें और देकर नसीहतें बार बार कहां तुम जा रहे हो सता कर बेचैन दिल की धड़कने बढ़ा रहे हो
                                                                 
                            
तेरी मर्जी का मालिक मैं हो ना सका बुझा कर दिल के अरमां सारे मेरे करके कोशिश तमाम सदमें तुम बढ़ा रहे हो
छीन कर हक जीने खुश हो तुम बहुत करके तन्हा दर्द बढ़ाते गए और करके वादे भी हज़ार फर्ज तुम निभा रहे हो
जीना आया कहां हमें जिंदादिली से होना था इक हादसा टल ना सका कभी बढ़ा के तन्हाई अरमां तुम मिटा रहे हो
पी कर आंसू बार बार मत पूछो दर्द कितना हम बढ़ाए हैं और मिटा के ख्वाहिशें सारी मेरी अहसान तुम जता रहे हो
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56 मिनट पहले

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