करके फैसला खिलाफ मेरे गर तुम खुश हो तो कोई बात नहीं खाकर ठोकरें बार बार अरमां हम मिटाने लगे
गर खाना धोखा किस्मत मेरा तो करूं क्या बुझा के दिया आस का होकर मायूस दर ब दर हम भटकने लगे
ना रही जिंदगी किसी काम की कहूं दर्द मैं किस किस से गुजार कर जिंदगी किस तरह दिल को कोसने लगे
जला कर चिराग़ किसी के दिल का बुझाना गर है शौक तेरा तो करूं क्या सता के दिल को दर्द छुपाने लगे
कर लो तुम कुछ और मनमानियां कोई बात नहीं परख कर अंदाज़ तेरा होकर मायूस फासला बढ़ाने लगे
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