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पैमाना ए रस्म ए उल्फत

                
                                                         
                            कौन कहता है मोहब्बत में असर नहीं होता है मै कहता हूं असर दिल टूटने के बाद होता है
                                                                 
                            
करके याद अपनों को दिल मेरा भी रोता है जब अपना ही इस दुनियां से रुखसत होता है
करके याद तुझे बेकरार ए दिल को करार आया जब मुझसे गुफ्तगू खातिर तू करीब आता है
हमारा शुरूर ऐसा मोहब्बत बदनाम जब तक न हो तब तक मेरे दिल को आराम नहीं होता है
जब भी तुमसे अब रस्म ओ राह ए मुलाकात होता है वो भी तो नजर ए रस्म ए इनायत होता है
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एक घंटा पहले

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