सिंदूर शक्ति है, एक स्त्री का व्यक्तित्व
हर कार्य में दे असीम शक्ति की पहचान
व्याह्य कोमल प्रवृत्ति लिए वो
अंतकरण में करती शक्ति का ध्यान ।
अनेकों नाम, विविध अवतार उसके
देश की गौरव, घर की लक्ष्मी
समस्त मानव जाति अधीन है जिसके
ना ऐश्वर्या, ना धन सम्पति की इच्छा
ममतामयी नारी , जो देती मुक्तहृदय सबको
अल्प प्रेम और सम्मान की उसको चाह ।
हंसकर सबको अपनाया, आचल का दूध है पिलाया
माँ काली के लाल नेत्रों सा बल उसमें
मोहिनी सा सबको मोह लेने की माया ।
बढ़ने दो नारी को आकाश की ओर
स्वर्ग का फल प्राप्त होगा सबको
करोगे जो उसका अपमान, अनादर
नरक का द्वार सामने दिखेगा तुमकों ।
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