आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

विनती

                
                                                         
                            भगवान
                                                                 
                            
मदद कर दो मेरी

परेशानी
आपको ही मालूम होगी

ये कुछ दिन
बहुत कीमती हैं

मुझे ख़ुशहाली
की नेमतें दें 

मैं बेफ़िक्र
बागों में चलना चाहता हूं

मैं वरक़ दर वरक़
किताबें पढ़ना चाहता हूं

मैं नहीं
प्यास में मरना चाहता हूं

मैं सारी
यादों को भूलना चाहता हूं







.
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर