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ख़्यालो का सैलाब

                
                                                         
                            जब ख़्यालो का सैलाब
                                                                 
                            
दिल में उमड़ कर आता है

कुछ अधूरी बातों के साथ
कुछ अधूरे ख़्वाब लाता है

कुछ अनसुलझे सवालों के
सुलझे हुए जवाब लाता है

तो कुछ जायज जवाब पर
फिर नए सवाल उठाता है

जब ख़्यालो का सैलाब
दिल में उमड़ कर आता है

तिनके सा बना ज़ेहन को
कहां से कहां ले जाता हैं

जिस्म सोया रहता जमीं पर
जुस्तजू आस्मां ले जाता है

जब ख़्यालो का सैलाब
दिल में उमड़ कर आता है

पुराना सा था वो जो कुछ
अपने साथ बहा ले जाता हैं

एक नई सोच का सागर
दिल में फिर सजा जाता है

जब ख़्यालो का सैलाब
दिल में उमड़ कर आता है
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34 मिनट पहले

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