कर अंधेरों को दफा चलो
उजाले बांट लें।
जो रह गये राह में अकेले
जरा हाथ थाम लें।
यूं तो जिंदगी मिली है इक बार।
चलो कर नेकी खुदा की नजरों में
खुद को संवार लें।
-रजनी नितेष पांडेय
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