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नादिर के इंकलाबी दोहे

                
                                                         
                            फांसी का फंदा बना, वीरों की अब शान।
                                                                 
                            
हँसकर चूमा मौत को, वो थे अमर महान।

रग-रग में लावा बहा, शोला सी जवानी।
लिखे गए तीनों वीर, बनी अमर कहानी।

इंकलाब की गूँज से, काँपा तख्तो-ताज।
तीनों शेरों ने किया, भारत का आगाज़।

अमर शहीदों ने दिया, ऐसा अनुपम दान।
मिट कर भी वो रख गए, भारत माँ की शान।

गर्म लहू की धार से, लिख डाला पैगाम।
आज़ादी के वीर को, शत-शत करूँ प्रणाम।
— रोहित शर्मा भारद्वाज 'नादिर'
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41 मिनट पहले

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