सफ़र भी छूट जायेगा
शहर भी छूट जायेगा
जहां पैदा हुये थे हम ओ
दर भी छूट जायेगा
जिस आंगन में गिरे थे हम
जहां सीखा संभालना था
कभी सोचा ना था हमने
ओ घर भी छूट जायेगा
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