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साग़र सिद्दीक़ी: भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए

saghar siddiqui famous ghazal bhooli hui sada hoon mujhe yaad kijiye
                
                                                         
                            


भूली हुई सदा हूँ मुझे याद कीजिए
तुम से कहीं मिला हूँ मुझे याद कीजिए

मंज़िल नहीं हूँ ख़िज़्र नहीं राहज़न नहीं
मंज़िल का रास्ता हूँ मुझे याद कीजिए

मेरी निगाह-ए-शौक़ से हर गुल है देवता
मैं इश्क़ का ख़ुदा हूँ मुझे याद कीजिए

नग़्मों की इब्तिदा थी कभी मेरे नाम से
अश्कों की इंतिहा हूँ मुझे याद कीजिए

गुम-सुम खड़ी हैं दोनों जहाँ की हक़ीक़तें
मैं उन से कह रहा हूँ मुझे याद कीजिए

'साग़र' किसी के हुस्न-ए-तग़ाफ़ुल-शिआर की
बहकी हुई अदा हूँ मुझे याद कीजिए

एक महीने पहले

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