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बशीर बद्र: उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं

bashir badra famous ghazal udas ankhon se ansoo nahin nikalte hain
                
                                                         
                            


उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं
ये मोतियों की तरह सीपियों में पलते हैं

घने धुएँ में फ़रिश्ते भी आँख मलते हैं
तमाम रात खुजूरों के पेड़ जुलते हैं

मैं शाहराह नहीं रास्ते का पत्थर हूँ
यहाँ सवार भी पैदल उतर के चलते हैं

उन्हें कभी न बताना मैं उन की आँखों में
वो लोग फूल समझ कर मुझे मसलते हैं

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से
कहीं भी जाऊँ मिरे साथ साथ चलते हैं

ये एक पेड़ है आ इस से मिल के रो लें हम
यहाँ से तेरे मिरे रास्ते बदलते हैं

1 सप्ताह पहले

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