नहीं है कोई और सहारा,
बस यही मेरा संसार है,
किताबों के पन्नों में ही,
मेरा सारा प्यार है।
ना कोई भाई,
ना कोई मित्र,
ना कोई दूजा सखा,
इनके मौन शब्दों में ही,
जीवन का सुख लिखा।
जब कोई नहीं होता पास,
ये थाम लेती हैं हाथ,
उदासी की हर बेला में,
ये रहती हैं मेरे साथ।
हज़ारों बातें ये कहती हैं,
पर शोर नहीं करतीं,
मेरे दिल के ज़ख्मों को,
ये चुपके से भरतीं।
कभी जो पढ़ते-पढ़ते,
आँखें भर आती हैं मेरी,
इन्हें सहेजने में ही,
खुशनुमा है ज़िंदगी मेरी।
ज़रा सी खरोंच आए इन पर,
तो मन व्याकुल हो जाता,
इसे पढ़ना नहीं,
इन्हें 'जीना' मुझे सबसे ज़्यादा भाता।
इनके पास बैठूँ तो,
वक़्त ठहर सा जाता है,
बाहरी शोर सारा,
कहीं बहुत दूर खो जाता है।
बिना पढ़े भी पास बिठा लूँ,
तो दिल को सुकून मिलता,
जैसे बंद कमरे में कोई,
ताज़ा फूल खिलता।
ये पन्ने नहीं हैं केवल,
ये तो रूह का हिस्सा हैं,
मेरी हर खुशी,
मेरी हर उदासी का ये क़िस्सा हैं।
दुनिया तो बदलती है,
पर ये साथ निभाती हैं,
तन्हाई के इस सफर में,
ये मुझको महकाती हैं।
मेरी सबसे बड़ी दुनिया,
बस इन्हीं में समाई है,
किताबों की इस चौखट पर,
मुझे अपनी मंज़िल मिली है।
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