रणभेरी आज पुकार रही, सोया अभिमान जगाना है,
जिस माटी ने सर्वस्व दिया, उसका हर कर्ज चुकाना है।
लहरों की लहरें गरज उठीं, अंबर भी हुंकार भरे,
भारत माँ के बेटे अब तो, मौत से भी ना तनिक डरें।
तलवारों की धारों पर जो, अपना इतिहास लिखते हैं,
वो वीर देश के बेटे ही, हर युग में अमर दिखते हैं।
सीने में दहके आग देशभक्ति की, आँखों में अंगारा है,
यह पुण्य भूमि, यह वीर भूमि, केवल और केवल हमारा है।
सीमा पर जो रक्षक बैठे, वो बर्फों में भी तपते हैं,
मातृभूमि की रक्षा खातिर, रातों भर वो ना सोते हैं।
गोली की बौछारें झेलीं, पर कदम ना पीछे मोड़ेंगे,
जो आँख उठाएगा माँ पर, उसका हम मस्तक तोड़ेंगे।
रक्त गिरा जो इस माटी पर, वो चंदन बनकर महकेगा,
हर एक कतरा इस जीवन का, राष्ट्र की वेदी पर दहकेगा।
कायरता का कोई काम नहीं, यहाँ शौर्य का ही सम्मान है,
तिरंगे की ऊँची शान रहे, यही हर सच्चे देशभक्त का अरमान है।
ना सत्ता की कोई चाह हमें, ना वैभव की अभिलाषा है,
भारत माँ की सेवा ही तो, जीवन की सच्ची परिभाषा है।
जाति और पांति के बंधनों को, ठोकर मारकर तोड़ेंगे,
एक सूत्र में बँधकर हम, अखंड भारत को जोड़ेंगे।
हँसते-हँसते फाँसी चूमे, जो भगत, राजगुरु, सुखदेव यहाँ,
बिस्मिल की वो अमर तान, गूंजेगी अब हर ओर यहाँ।
शहीदों के बलिदानों को, व्यर्थ ना हम जाने देंगे,
आँचल पर अपनी महतारी के, दाग ना हम आने देंगे।
आओ मिलकर शपथ उठाएँ, राष्ट्र को सर्वोपरि मानेंगे,
संकट की इस घड़ी में भी, हम अपना फर्ज पहचानेंगे।
एक कदम बढ़ाएँ आगे हम, वैभव का नया सवेरा हो,
दुनिया के कोने-कोने में, बस भारत का ही डेरा हो।
जय घोष करो तुम अंबर तक, गूंजे वंदेमातरम का नारा,
प्राणों से भी प्यारा है हमें, यह देश हमारा, जग से न्यारा।
सौगंध हमें इस माटी की, हम शीश कटाने आए हैं,
भारत माँ के चरणों में, हम जीवन वारने आए हैं।
-सुरेश पटेल "सुरेश"
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