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वर्षा

                
                                                         
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जब वर्षा की पहली बूँद ने
धरती के मस्तक को चूमा
तब केवल मिट्टी ही नहीं महकी
मानो युग से मौन पड़ा इतिहास भी बोल उठा

आकाश ने अपने मन का भार
बूँद-बूँद धरती पर उतारा
धरती ने उसे आँचल में समेटकर
जीवन का नया अध्याय रच दिया

वर्षा केवल जल का स्रोत नहीं है
अनंत किसानों के लिए अन्न की जननी है
लाखों कवियों के लिए संगीत है
कलाकारों के लिए रंगों का उत्सव है
पुजारियों के लिए ईश्वर की करुणा का प्रतीक है
एक शब्द में कहें तो
वर्षा जीवनदाता है

वर्षा समाज का दर्पण है
वर्षा किसी के लिए उत्सव बन जाती है
तो वर्षा किसी के लिए संघर्ष बन जाती है

वर्षा की पहली फुहार से कहीं
पकौड़ों की सुगंध उठती है
कहीं टपक रही छत
वर्षा के बंद होने का इंतज़ार करती है

वर्षा सभी पर समान रूप से गिरती है
किन्तु परिस्थितियाँ भिन्न-भिन्न बना देती हैं
वर्षा सबको सिखाती है कि
समान अवसर और समान परिणाम
सबके लिए समान नहीं होते हैं

बादल किसी खेत पर ज़्यादा देर नहीं रुकते
बादल किसी विशेष क्षेत्र से प्रेम नहीं करते
वे तो अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं
परंतु आज का समाज
पैसे के लिए अपने कर्तव्यों को भुला बैठा है

मनुष्य की प्रकृति
संसाधनों का वितरण
सामाजिक परिस्थितियाँ अलग होती हैं
इसी कारण वर्षा का यह अंतर उत्पन्न होता है

वर्षा बिना शब्दों का प्रयोग किए
अनेक परतों को उजागर करती है

वर्षा की बूँदें जब धरती पर गिरती हैं
तो वह किसी का परिचय नहीं पूछती
वह महलों की छत पर उतनी ही सहजता से गिरती है
जितनी सहजता से किसी झोपड़ी के टूटे छप्पर पर

वर्षा किसी के लिए आनंद बन जाती है
तो किसी के लिए चिंता की लंबी रात
यह अंतर प्रकृति का नहीं
बल्कि समाज की परिस्थितियों का है

आर्थिक उन्नति के लिए वर्षा
बहुमूल्य संसाधन है
वर्षा केवल मौसम नहीं
करोड़ों किसानों की जीविका का आधार है

खेतों में लहलहाती फसलें
मंडियों की रौनक
व्यापार की गति और गाँव का विकास
ये सब वर्षा का मौन योगदान है

वर्षा समय पर हो जाए तो समृद्धि
वर्षा समय पर न हो तो कठिनाई

समाज कहता है कि
वर्षा होने से बहुत परेशानी होती है
जब समाज में भ्रष्टाचार होगा
तो परेशानियाँ जन्म लेंगी ही

 
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5 घंटे पहले

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