आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

तुमसे कहना था जो वो कहा ही नहीं!

                
                                                         
                            तुमसे कहना था जो वो कहा ही नहीं!!
                                                                 
                            
और कहने को अब कुछ बचा भी नहीं!!

तुम को सुनने में मैं इतनी मशग़ूल थी
तुम ने क्या कुछ कहा ये सुना ही नहीं!

शौक़ ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी मानिए!
सिर्फ़ सांसों से ही ज़िन्दगानी नहीं!!

तुमको लगता है तुम बांध लोगे उसे
अपने दरिया के बस में जो पानी नहीं!!

साथ मेरे ,मेरी सारी सखियाँ भी हैं!
अपने मोहन की मैं ही दीवानी नहीं!!

दिल से है वो ज़मीं क़द से है आसमां
मेरे महबूब का कोई सानी नहीं!!

उस ख़ुदा की इनायत हुई इस तरह
आज 'रूबी' किसी की बेगानी नहीं!!

- रूबी गुप्ता सत्येंद्र
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
55 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर