तुमसे कहना था जो वो कहा ही नहीं!!
और कहने को अब कुछ बचा भी नहीं!!
तुम को सुनने में मैं इतनी मशग़ूल थी
तुम ने क्या कुछ कहा ये सुना ही नहीं!
शौक़ ज़िन्दा है तो ज़िन्दगी मानिए!
सिर्फ़ सांसों से ही ज़िन्दगानी नहीं!!
तुमको लगता है तुम बांध लोगे उसे
अपने दरिया के बस में जो पानी नहीं!!
साथ मेरे ,मेरी सारी सखियाँ भी हैं!
अपने मोहन की मैं ही दीवानी नहीं!!
दिल से है वो ज़मीं क़द से है आसमां
मेरे महबूब का कोई सानी नहीं!!
उस ख़ुदा की इनायत हुई इस तरह
आज 'रूबी' किसी की बेगानी नहीं!!
- रूबी गुप्ता सत्येंद्र
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