सारी इन्द्रियों पे सुखदाई बेफ़िक्री पसर गई
और, छाई है एक स्वप्निल शान्ति चारों ओर
छायादार धरती पर ख़ामोशी का असर वही
बे-छाया भूमि पर गहरी चुप्पी, न कोई शोर
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