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वो तेरी होकर भी न हुई, और पूरी उम्र उसी के नाम लिखी जाएगी।

                
                                                         
                            यही बात रह गई हमारी गोपन कथाओं को सब से बतलाओगी
                                                                 
                            
मैं तुझे से दूर नहीं हु मगर ये बतलाओ तुम मेरे पास कब आओगी

अब तो रख दिया अपना शीश तेरी कदमों में
अब कहो ना आखिर कब तक ऐसे ही रुलाओगी

तेरी अनकही बातों को सुन उस के सहारे ही गुज़ारी हैं रातें,
कहो कब तक मेरी आँखों को ख़्वाबों में यूंही उलझाओगी।

तेरी बेहतर मंज़िल की तलाश में कही ये रास्ते छूट न जाए,
अगर तू लौटकर फिर मिलने न आई तो बता किसको अपना हाल सुनाओगी।

तेरे जाने से मेरे वजूद में इक ख़ला-सा रह गया,
मैं जो खुद में लौट भी आऊँ तो तुम मुझसे दूर हो जाओगी

शास्त्री तेरे हिस्से में बस इतनी-सी मोहब्बत आई,
वो तेरी होकर भी न हुई, और पूरी उम्र उसी के नाम लिखी जाएगी।
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एक दिन पहले

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