क़िस्मत!
सबकी एक जैसी क्यों नहीं होती?
किसी के पग-पग पर बिछे फूल है,
तो किसी के पग-पग पर बिछे शूल है!
किसी को घर से निकलते ही मिल
जाती अपनी मंजिल है,
तो कोई ताउम्र संघर्ष में लगा रहता है!
ऐसा क्यों होता है?
कोई जिन्दगी भर हँसता है,
तो कोई जिन्दगी भर रोता है!
किसी पर शनि भारी है,
तो किसी को हँसी आ रही है!
किसी को मालूम हो तो मुझे भी बताना,
कि सबकी क़िस्मत,
एक जैसी क्यों नहीं होती?
-शिवेष
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