जब भोर तिरंगे की रंगत लेकर आती है,
भारत माँ के चेहरे पर मुस्कान सज जाती है।
खेतों की हरियाली गाती, नदियाँ गीत सुनाती हैं,
आजादी की अमर कहानी पर्वत भी दोहराते हैं।
यह केवल एक तारीख नहीं, बलिदानों की पहचान है,
अनगिनत वीरों के सपनों का साकार हुआ सम्मान है।
किसी ने हँसकर प्राण दिए, किसी ने जेलें काटीं,
तब जाकर हमने स्वतंत्रता की उजली किरणें बाँटीं।
आओ ऐसा भारत गढ़ें, जहाँ प्रेम का दीप जले,
मेहनत, सत्य और सद्भाव से हर सपना आगे चले।
तिरंगा केवल ध्वज नहीं, यह राष्ट्र की आत्मा है,
इसके सम्मान में जीना ही सच्ची देशभक्ति की परिभाषा है।
स्वतंत्रता दिवस पर यही संदेश सुनाएँ हम,
भारत की गौरव गाथा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ हम।
-सूरज पालोदिया
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