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                            अपनी पनाह में मुझे रहने दीजिए।
                                                                 
                            
जो हो रहा उसमें सहयोग कीजिए।।

दिल चाह कर जुदा ना रह पाएगा।
दिल को और बोझिल ना कीजिए।।

आप के बिना कोई सो कैसे पायेंगे।
अपनी गोद को यों सूना ना कीजिए।।

इन हाथो को जरा सेवा का मौका दो।
मोहब्बत को तिरस्कार ना कीजिए।।

रोक ना पाऊँगा आँसुओं को 'उपदेश'।
आस-पास ही सही दूर ना कीजिए।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
41 मिनट पहले

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