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ग़ज़ल ( उसे देखना...)

                
                                                         
                            उसे देखना अच्छा लगता है दिल को
                                                                 
                            
यही प्यार है ऐसा लगता है दिल को
मुझे नहीं मालूम कि मैं क्या चाहता हूं
धड़कन - धड़कन ये क्या लगता है दिल को
दिल को है अहसास ज़िन्दगी का जो अब
वो इक ख़्वाब, तजुर्बा लगता है दिल को
सच पूछो तो सच तो ये ही है कि हमें
अपने हाल पे छोड़ना पड़ता है दिल को
उसे भी मेरे हाल की कुछ - कुछ ख़बर तो है
ऐसा है या ऐसा लगता है दिल को
ज़ेहन को लगते हैं सब दोस्त सभी के हैं
मगर हर कोई तन्हा लगता है दिल को
'रंग' बेवफ़ा हो तुम ऐसा कहें अगर
तो वो क्या है जो धड़काता है दिल को
- मृदुल 'रंग'
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एक घंटा पहले

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