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यह कलम नहीं मेरा वह दोस्त वही

                
                                                         
                            यह कलम नहीं मेरा वह दोस्त वही,|
                                                                 
                            
जिसे पकड़ कर करती हूं मैं अपना हर भोज हल्का यही||

नहीं सीखना मुझे लय ,छंद व अलंकारों को सटीक बनाना|
बस भर देना है इसमें मुझे अपनी खुशी, गम और मुझे मिला हर ताना||

कलम को जब से हाथ में मैंने पकड़ा है|
किसी कागज के टुकड़े में मेरे भावों को जकड़ रखा है||

अच्छी कविता नहीं अच्छी कहानी नहीं अच्छा लेख मुझे नहीं लिखना|
जिंदगी में जो सीख समझा वह सब कलम से व्यक्त करना||
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55 मिनट पहले

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