लाल किले की छाया में : जब युवा सवाल पूछने लगे।
लाल किला देखा था इतिहास की किताब में,
आज देखा खबर की लाइन में।
शिक्षा के मंत्री,बड़े-बड़े वादे,
" हर बच्चा पढ़ेगा" वाले नारे,
जिनके हाथ में कलम होनी चाहिए थी,
उनके शरीर पर लाठियों के निशान हैं।
जो देश का भविष्य हैं,युवा हैं,
वहीं सड़क पर घसीटे, पीटे और बेइज्जत है।
सवाल पूछना गुनाह बना दिया,
ओर खामोशी को देशभक्ति का नाम दे दिया।
जिन्हें शिक्षा का 'श' नहीं आता वे शिक्षा मंत्री,
जिन्हें 'उच्च' नहीं लिखना आता वे उच्च शिक्षा मंत्री,
जिन्हें कृषि का 'क' नहीं आता वे कृषि मंत्री,
जिन्हें 'स्वास्थ्य' का मतलब तक नहीं पता वे स्वास्थ्य मंत्री।
नाम बड़े ,दर्शन छोटे,
कुर्सी बड़ी काम थोड़े,
नारा नहीं चाहिए,न्याय चाहिए,
तस्वीर नहीं चाहिए,सुरक्षा चाहिए।
इंसानियत के नाते कुछ लोग अभी भी जिंदा हैं जैसे सोनम वांगचुक_
26 दिन से भूखा एक जिस्म,
पर जिंदा है एक सवाल।
लद्दाख की वादियों से उठी आवाज,
दिल्ली के गलियारों तक बेहाल।
-एक युवा की कलम से
-उषा कुमारी
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