थक कर जब लौटे इंसान इस जमाने से,
मरहम मिल जाता है बस घर के ठिकाने से।
बच्चों की हँसी, माँ की दुआओं का असर,
जिंदगी फिर खिल उठती है हर बहाने से।
ना कोई डर रहता, ना कोई कमी लगती है,
जब अपने साथ हों तो हर खुशी सजी लगती है।
दुनिया की भीड़ में चाहे कितना अकेलापन हो,
घर आते ही हंसी खुशी अपनेपन सी लगती है।
-विजय बिंदास राजा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X