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मशरूफियत

                
                                                         
                            उनकी मशरूफियत को हमने मुकद्दर मान लिया,
                                                                 
                            
हर अधूरी बात को दिल में ही थाम लिया।

न शिकवा किया, न कोई सवाल रखा,
खामोशी को अपना हमकलाम लिया।

वो खुश रहें, यही सोचकर दूर हो गए,
अपने अरमानों को हमने गुमनाम किया।

विक्की, मोहब्बत में हारकर भी क्या हारे,
बस दर्द को शायरी का नाम दिया।।
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एक घंटा पहले

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