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रूह का अक्स

                
                                                         
                            कभी याद मेरी आए तो आईने के सामने मुस्कुरा देना,
                                                                 
                            
यक़ीन मानो, अक्स मेरा ही दिखेगा हर मोहब्बत के फ़साने में।

तुझे पाने की ख़्वाहिश से ज़्यादा, तुझे चाहा है मैंने,
इसीलिए तेरा नाम रखा है अपनी हर दुआ के तराने में।

तेरी ख़ुशियों की ख़ातिर ख़ुद को भी भुला बैठा हूँ,
मेरा ज़िक्र मिलेगा हर सच्चे दिल के अफ़साने में।

दूर रहकर भी तेरे क़रीब होने का हुनर सीखा है,
रूहें मिल ही जाती हैं इश्क़ के पाक ठिकाने में।

तू कभी ख़ामोश होकर अपने दिल की धड़कन सुनना,
मेरा नाम ही गूँजेगा उन मासूम फ़सानों में।

वक़्त चाहे जितनी गर्द बिछा दे यादों के रास्तों पर,
मोहब्बत फिर भी महकेगी बरसों पुराने ख़ज़ाने में।

लोग कहते हैं इश्क़ की उम्र बहुत छोटी होती है,
मैंने उसे बसाया है अपनी साँसों के आशियाने में।

अगर कभी आँखें नम हों, तो मेरा नाम भर लेना,
सुकून उतर आएगा तेरे हर दर्द के पैमाने में।

और जब कोई पूछे, कैसी थी वो मोहब्बत तेरी,
बस मुस्कुराकर कहना—
"वो आज भी रहता है मेरे दिल में,
और उसका अक्स दिखता है हर मोहब्बत के फ़साने में।"

 
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5 घंटे पहले

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