मेरी हुकूमत, मेरी ग़ुलामी दोनों बराबर रख कर देख लेता हूँ।
मैं मौत को सिर्फ़ छूता नहीं हूँ, मर कर भी देख लेता हूँ।
मेरी जिंदगी इंसाफ मांग रही है।
मुझे दिलासे की जरूरत नहीं है।
मैं लिखता चला जाऊंगा क़यामत।
मुझमें इंकलाब की कोई कमी नहीं है।
मैं हूँ एक वीर योद्धा।
मुझमें साहस है, मुझमें ताक़त है।
मैं रहता हूँ दूर अपने घर से।
देश की यही तो सही हिफाजत है।
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