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उसे सारे दांव पेंच आते हैं

                
                                                         
                            उसे सारे दांव पेंच आते हैं।
                                                                 
                            
वो इस खेल में माहिर भी है।
और वो इस खेल में शामिल भी हैं।
वो कलाकार भी है, और कातिल भी है।
वो प्यार मोहब्बत के काबिल भी है।
वो उस रास्ते का एक लौता मालिक भी है।
उसमें गुरूर है, की वो ही जीतेगा।
जीत खेल में उसकी निश्चित है।
वो इतना काबिल है।
जिदंगी तो कोई बड़ी बात ही नहीं उसके लिए।
मौत तो उसकी बाराती है।
वो चाहे तो पलट दे खेल एक झटके में।
मोड़ दे ज़िंदगी के सारे उसूल।
वो भरोसे के काबिल भी है।
वो ही एक सच्चा इंसान कहलाने के काबिल भी है।
ख़ुदा से जो गहरा रिश्ता बनाए रखता है।
वो सिर्फ़ एक इंसान ही नहीं, बल्कि फरिश्ता भी है।
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एक घंटा पहले

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