आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दोहा पंचक

                
                                                         
                            विघ्न हरण मंगल करण,गौरी पुत्र महान।
                                                                 
                            
पद लिखने की शक्ति दो, करूं नित्य गुणगान।१।
विनय करूं मां भारती, रखूं चरण में मात।
आय विराजो कंठ में ,लें वीणा कूं हाथ।२।
राकापति है भाल पर,जटाजूट में गंग।
अवढर दानी देव हैं, गौरी के अर्धंग।३।
श्री राधा जू, श्याम जू,सब तत्व न के तत्व।
विनय भूलकर जगत कूं, इनसे रख अपनत्व।४।
विनय यही है दास की, चरणों में रघुनाथ।
मेरे मन की डोर प्रभु, रखना अपने हाथ।५।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर