विघ्न हरण मंगल करण,गौरी पुत्र महान।
पद लिखने की शक्ति दो, करूं नित्य गुणगान।१।
विनय करूं मां भारती, रखूं चरण में मात।
आय विराजो कंठ में ,लें वीणा कूं हाथ।२।
राकापति है भाल पर,जटाजूट में गंग।
अवढर दानी देव हैं, गौरी के अर्धंग।३।
श्री राधा जू, श्याम जू,सब तत्व न के तत्व।
विनय भूलकर जगत कूं, इनसे रख अपनत्व।४।
विनय यही है दास की, चरणों में रघुनाथ।
मेरे मन की डोर प्रभु, रखना अपने हाथ।५।
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