फिर उसी जगह से शुरू नई कहानी होगी,
नाम बदले हुए होंगे,पर बात पुरानी होगी।
क्यूं हर शख्स से रखते हो दूरियां इतनी,
कोई तो होगा..जिसकी हर बात तुमने मानी होगी।
किया था उसने कभी मुझसे कोई वादा नहीं..
मोहब्बत पहली थी,एकतरफा ही निभानी होगी।
वो अकेला था सच का आफताब था..
अंधेरों को उसे हराने के लिए ताकत तो लगानी होगी।
फूल हैं,खुशबुएं हैं,रंग और ख्वाब हैं पर..
वो भी हो जाय मेरा,ये उसकी मेहरबानी होगी।
बना के घरौंदे रेत पर वो तोड़ देती है..
घर कहने के लिए, इक इमारत तो बनानी होगी।
जानती हूं एक दिन ये सब टूट जाएगा..
रोज जीने के लिए एक उम्मीद तो जगानी होगी।
- विनीता
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