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चलों अब मुस्कुराते हैं...

                
                                                         
                            अलसाई थकी आंखों में नए सपने सजाते हैं,
                                                                 
                            
उदासियों का दौर गुजर गया चलो अब मुस्कुराते हैं||
जो हमसे अब भी जलते हैं उन्हें हम प्यार से बुलाते हैं,
मेहनत की आग में खुद को फिर से तपाते हैं,
उदासियों का दौर गुजर गया चलो अब मुस्कुराते हैं||

हिम्मत की आस हमारी कभी न टूटे,
बीच सफर में साथ किसी का न छूटे,
धीरे - धीरे चलों मंजिल मिल जाएगी,
उम्मीदों का गुबार कभी न फूटे!!
जो हमें बेवजह सताते हैं उनको रास्ता दिखाते हैं,
उदासियों का दौर गुजर गया चलो अब मुस्कुराते हैं||

दुनिया बिना मतलब भटकायेगी,
आपको गलत रास्ता दिखाएगी,
पर तुम चलते रहना हिम्मत करके,
फिर यही दुनिया तुम्हारे आगे सर झुकाएगी!!
हम अपने आप को इतना क्यों तड़पाते है,
घिसी - पिटी हुई बातें क्यों बनाते हैं?
चलो नया संकल्प उठाते हैं फिर से मुस्कुराते हैं||
-माही
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

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