ना जाने,कब छोटी से बड़ी हुई।
खुद , अपने पैरों पर खड़ी हुई।।
वो, जिसको गोद खिलाया था।
बुढ़ापे मे , सहारे की छड़ी हुई।।
कोई नजर , उसे लग जाये ना।
मंजिल की जिद पर अड़ी हुई।।
-यूनुस खान
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