अगरचे अपने मुंह में वो ज़बान रखता है।
ख़ामोश रहकर अलग पहचान रखता है।।
नज़रों से क़त्ल करने का फन जानता है।
मगर बज़ाहिर खुद को नादान रखता है।।
-यूनुस खान
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