बात , मुंसिफ-ओ-दरबार तक गयी।
नौबत दुहाई और पुकार तक गयी।।
लड़ाई जो सुलझ सकती थी घर मे।
घर से निकलकर बाज़ार तक गयी।।
-यूनुस खान
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