आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सूर्यकांत त्रिपाठी निराला: एक-दो मुलाकात में निकल जाता था साहित्य से संदेश 

निराला
                
                                                         
                            महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के जीवन से जुड़े ऐसे बहुत से किस्से हैं जो कला और साहित्य को परिभाषित करते हैं। उनका जीवन उनके नाम के अनुसार ही निराला था। जो भी निराला से मिलता वह उससे बातचीत के दौरान ही साहित्य का कोई न कोई संदेश निकाल देते थे। अपनी बातचीत को टिप्पणी या शीर्षक दे देते थे। उनसे एक युवक की मुलाकात का किस्सा हम मुड़ मुड़ के देखता हूं वर्ग के तहत पेश कर रहे हैं। ऐसे प्रसंगों का उल्लेख यहां इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हम यह बताना चाहते हैं कि निराला का चिंतन जियो और जीने दो की कला को ही श्रेष्ठ कला मानता था। 
                                                                 
                            
  आगे पढ़ें

एक मद्रासी युवक निराला जी से सर्द मौसम में चादर मांगकर ले गया

22 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर