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जब शकील बदायूंनी ने मुशायरे में सरेआम डांट खाई...

शकील बदायूंनी
                
                                                         
                            शकील बदायूंनी हमारे बचपन की यादों में बसा नाम है। रेडियो पर विविध भारती सुन सुनकर जवान होने वाली पीढ़ी को अच्छी तरह पता है कि शकील बदायूंनी कौन थे। क्या जमाना था जब कान में पड़ने वाला हर दूसरा सुरीला गाना शकील बदायूंनी की कलम की निशानी रखता था। कितने रंगीन, कितने रूमानी मगर कितने सादा लफ्ज़ होते थे शकील साहब की शायरी में....! 
                                                                 
                            

सुहानी रात ढल चुकी, न जाने तुम कब आओगे....
जहां की रुत बदल चुकी, न जाने तुम कब आओगे..... 

- (दुलारी)

और 

प्यार किया तो डरना क्या, जब प्यार किया तो डरना क्या
प्यार किया कोई चोरी नहीं की,  छुप छुप आहें भरना क्या ......

(मुगल-ए-आजम) आगे पढ़ें

मैंने पहली बार उन्हें ग्वालियर में मेले के मुशायरे में देखा...

8 वर्ष पहले

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