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पगडंडी, जो परिचित हरीतिमा को गुदगुदाती हुई किसी अपरिचित ठिकाने को जा रही हो

dharmvir bharti
                
                                                         
                            जब आप जिंदगी के भीड़-भाड़ वाले राजमार्ग पर थके-हारे, भीड़ की लहरों में धक्के खाते हुए, विवश आगे ढकेलते जा रहे हों और आपको अकस्मात एक छोटी पगडंडी रास्ते से फूटती दिखाई दे, जो परिचित हरीतिमा को गुदगुदाती हुई किसी अपरिचित ठिकाने को जा रही हो, तो मैं आपसे आग्रह करता हूं कि बिना कुछ भी सोचे-समझे, जल्दी से, तमाम जरूरी काम छोड़कर उस पगडंडी पर मुड़ जाइए।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

कभी-कभी थोड़ा पलायन बहुत स्वस्थ होता है। इसका अहसास मुझे तब हुआ, जब मैंने अपने को भटकते-भटकते उस चर्च के अहाते में पाया, जब सूरज डूब रहा था। और अकस्मात मीनार पर घंटे बजने लगे और हम दोनों मरियम की मूर्ति के सामने खड़े थे। बड़ी शीतलता थी। नीचे नम धरती पर एक खास तरह की घास जमाई गई थी। और तुम बेहद उदास थीं और मैं चुप और अंदर से भरा-भरा। और बिना कुछ बोले जैसे मैं तुम्हारे मन को टटोल रहा था, और बिना कुछ बोले तुम अपरिचित ममता से मुझे कण-कण भरे दे रही थीं। 
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16 घंटे पहले

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