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यमुना का दुःख, सुदामा के आंसू, राधा की पीड़ा और उनका एकांत महकता है कृष्ण में 

साहित्य
                
                                                                                 
                            कृष्ण निर्मोही हैं, इसीलिए कृष्ण से मोह हो जाता है। कृष्ण प्रेम की प्रवाहमान सरिता हैं। व्याकुल कंठों और तृषित उरों की सुध लेती संवेदना की सरिता। पर जैसा हर नदी की नियति है। उसे बहना है। यात्रा उसका धर्म है और प्यास मिटाना उसका कर्म। वैसा ही घटित होता है कृष्ण के साथ भी, वो अपने प्रिय को छोड़ देते हैं। पर उनका छोड़ना ऐसा है कि वो छोड़ने के बाद भी सदैव साथ बने रहते हैं। यह वियोग का योग है। ये आकार का निराकार हो जाना है। ये स्थूल का सूक्ष्म में बदल जाना है। एक देह में एक दुनिया का बस जाना।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                             
                                                
                                                                
                                        
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3 months ago

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