आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अमीर मीनाई: फूलों में अगर है बू तुम्हारी, काँटों में भी होगी ख़ू तुम्हारी

ameer minai famous ghazal phoolon mein agar hai boo tumhari
                
                                                         
                            


फूलों में अगर है बू तुम्हारी
काँटों में भी होगी ख़ू तुम्हारी

उस दिल पे हज़ार जान सदक़े
जिस दिल में है आरज़ू तुम्हारी

दो दिन में गुलू बहार क्या की
रंगत वो रही न बू तुम्हारी

चटका जो चमन में ग़ुंचा-ए-गुल
बू दे गई गुफ़्तुगू तुम्हारी

मुश्ताक़ से दूर भागती है
इतनी है अजल में ख़ू तुम्हारी

गर्दिश से है महर-ओ-मह के साबित
उन को भी है जुस्तुजू तुम्हारी

आँखों से कहो कमी न करना
अश्कों से है आबरू तुम्हारी

लो सर्द हुआ मैं नीम-बिस्मिल
पूरी हुई आरज़ू तुम्हारी

सब कहते हैं जिस को लैलतुल-क़द्र
है काकुल-ए-मुश्क-बू तुम्हारी

तन्हा न फिरो 'अमीर' शब को
है घात में हर अदू तुम्हारी 
 

एक दिन पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर