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World Poetry Day: उर्दू के चुनिंदा शेर

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                            माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
                                                                 
                            
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
- अल्लामा इक़बाल 


वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
- साहिर लुधियानवी  आगे पढ़ें

6 दिन पहले

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