बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है
~ असरार-उल-हक़ मजाज़
बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
~ इफ़्तिख़ार आरिफ़
कौन बदन से आगे देखे औरत को
सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में
~ हमीदा शाहीन
शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं
~ मुनीर नियाज़ी
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