आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

मैं उस की आंखों से छलकी शराब पीता हूं - हसरत जयपुरी

hasrat jaipuri ghazal main uski aankhon se chhalki sharaab peeta hoon
                
                                                         
                            
मैं उस की आंखों से छलकी शराब पीता हूं
ग़रीब हो के भी महंगी शराब पीता हूं

मुझे नशे में बहकते कभी नहीं देखा
वो जानता है मैं कितनी शराब पीता हूं

उसे भी देखूं तो पहचानने में देर लगे
कभी कभी तो मैं इतनी शराब पीता हूं

पुराने चाहने वालों की याद आने लगे
इसी लिए मैं पुरानी शराब पीता हूं
4 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर