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Social Media Poetry:  मेरी पूँजी मेरी असफलताएं हैं !

वायरल काव्य
                
                                                         
                            तुमने यश वैभव या स्वर्ण कमाया होगा
                                                                 
                            
मेरी पूँजी मेरी असफलताएं हैं !

तुमने पुरस्कार को संबल माना होगा 
मुझको  तिरस्कार  ने गले  लगाया है 
तुमने उत्सव रचे प्रदर्शन ही करने को 
मैंने   सिर्फ   अकेलापन ही  गाया है  

तुमने हर सुख चीख चीख कर गाया होगा
मेरे भीतर अनबोली भाषाएं हैं !

पीड़ाओं ने जब  कोई संगीत  बजाया 
असफलतायें  झूम  झूम कर  नाची हैं 
हर दिन होते घोर निराशा के उत्सव में
मैंने  मन  की  सभी  व्यथाएँ  बाँची हैं

दृश्य  देखकर  हर सुख भी शरमाया होगा
सुख के नर्तन की अपनी सीमाएं हैं !

हर आँसू में मेरे सौ सौ सपन घुले हैं 
हर आँसू हीरे की तरह सहेजा हमने
इस सागर में कहीं कला को रतन मिलेंगे
हर दुविधा को धन्यवाद ही भेजा हमने

मन ने मन को मन में ही समझाया होगा
दुख से बढ़कर हर दुख की छायाएं हैं !

साभार: ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से 

16 घंटे पहले

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