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सोशल मीडिया: तुम ना हो तो, हे देवी विश्व है फिर किसे गवारा

वायरल काव्य
                
                                                                                 
                            जानती तो सब हो तुम,
                                                                                                

फिर क्यूं करती हो ख़ुद को परे
मन तुम्हारा बेचैन रहता है,
असंख्य ख़्वाब बुनता है
फिर भी रहती हो डरी डरी।

जब रचा था ये विश्व उसने,
तो नहीं बनाया था तुम्हें
यूं बिलखने को हरदम,
हर वक़्त अपने मन को मारकर
दूसरों की ख़ुशी
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2 years ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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