कौन सा ग़म था जो ताज़ा न था
इतना ग़म मिलेगा अंदाज़ा न था
आपकी झील सी आंखों का क्या क़ुसूर
डूबने वाले को ही गहराई का अंदाजा न था
कभी रज़ामंदी तो कभी बग़ावत है इश्क
मोहब्बत राधा की है तो मीरा की इबादत है इश्क
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