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नोबेल पुरस्कार विजेता कवि हैरॉल्ड पिंटर की कविता : हँसी

Harold Pinter
                
                                                         
                            हँसी थम जाती है पर कभी नहीं होती खत्म
                                                                 
                            
हँसी झुठाने में लगा देती है अपना पूरा दम

हँसी हँसती है उस पर जो है अनकहा हर दम
ये झरती है और किकयाती है और रिसती है दिमाग़ में

ये झरती है और किकयाती है लाशों के दिमाग़ों में
यूँ सारे झूठ हँसते-हँसते किए जाते हैं फ़राहम

जिन्हें सोख लेती है सिर कटी लाशों की हँसी बेदम
जिन्हें सोख लेते हैं हँसती लाशों के मुँह हर कदम 

मूल अंग्रेज़ी से अनुवाद : अनिल एकलव्य
5 वर्ष पहले

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