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सारी इन्द्रियों पे सुखदाई बेफ़िक्री पसर गई: ऑस्कर वाइल्ड

सारी इन्द्रियों पे सुखदाई बेफ़िक्री पसर गई: ऑस्कर वाइल्ड
                
                                                         
                            सारी इन्द्रियों पे सुखदाई बेफ़िक्री पसर गई
                                                                 
                            
और, छाई है एक स्वप्निल शान्ति चारों ओर
छायादार धरती पर ख़ामोशी का असर वही
बे-छाया भूमि पर गहरी चुप्पी, न कोई शोर

तीखी गूँज सुनाई देती है, पीड़ा भरे रुदन की
लगे ज्यों कोई उदास अकेला पंछी रो रहा है
ये दुखी आवाज़ है अन्नपुट पक्षी के क्रन्दन की
कुहरीली पहाड़ी पे अपनी प्रिया को टोह रहा है 
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4 वर्ष पहले

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