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Book Review: शब्द की सार्थकता और कवि-चिंता

कित
                
                                                         
                            मुझे शब्द चाहिए
                                                                 
                            
कार्तिक के पवित्र मास में
पक उठे धान के सुगंधित खेतों के
अहर्निश सूखते जल में फंसी मछलियों की
पारदर्शी तरल आंखों में पसरती
निराशा को लिखने के लिए
खेत की घसियायी मेड़ों पर कई सुबहों से
टहल रहा हूँ मैं
सही शब्द की तलाश में ... (शब्दों का देश, पृष्ठ 193)
 
जिस कवि का यह कौल हो, कविता के प्रति समाज के दायित्व के प्रति उसके भीतर का जुनून समझा जा सकता है। राकेश मिश्र ने इधर कविता की वैसी ही फसल काटी है जैसे एक किसान पकी हुई सुनहली फसलें काटता है। उसकी उर्वर वसुंधरा उसे शस्य श्यामल धरा का जैसे पूरा आशीर्वाद लुटाती है वैसे ही उनका कवित्व गए कुछ वर्षों में ही परवान चढ़ा है। तीन कविता संग्रहों को आए अभी बहुत दिन नहीं हुए कि पुन:शब्दों का देश। इससे कवि की बेचैनी का पता चलता है। उनकी कविताएं हर क्षण का मुआयना लेने वाली कविताएं हैं। हर क्षण के लिए उनकी कविता के पास कुछ अनुभव हैं। जरूरी संदेश हैं। इस संदेशे को देने के लिए हर पल उनका कवि तत्पर रहता है। कविता ऐसे ही अवलोकनों का साक्ष्य होती है जहां कवि क्रेंद्रीभूत होकर जीवन के पक्ष में अपनी गवाहियां लिखता है।
 
उनकी कविता के प्रभावों पर लिखते हुए मैं कह चुका हूँ कि कवि शब्दों से कविता का एक घर बनाता है। ऐसा घर जहां अपनेपन का घेरा हो। ऐसी कोई बात अज्ञेय ने 'ऐसा कोई घर आपने देखा है' संग्रह की एक कविता में कही थी। वे भी कविताओं से एक घर बनाते हैं। ऐसा घर जहां अपनेपन का उजाला हो, जहां रिश्तों में एक हमदर्दी हो। जब वे एक कविता में यह कहते हैं कि ' एक बच्चे की आवाज/ जीरे की महक से सराबोर / फेरी लगाती है मेरी चेतना की गली में' तो लगता है इस कवि के पास चेतना की स्वच्छ पाटी तो है जिस पर प्रेम की अमिट स्याही से कुछ लिखा जा सकता है। बेशक राकेश मिश्र ने तमाम कविताएं लिखी हैं जिनके उनवान बेशक भिन्न हों पर उनकी चेतना में एक सा उजाला है, उसमें एक सी धूप है, एक सी छांव है, एक सी ऋतुएं हैं, एक सा मिजाज है। पर जो दो कविताएं मैंने चुनी हैं वे लाजबाव हैं। इन कविताओं से उनकी कविता का प्रयोजन समझ में आता है। कविता आखिर निज का दर्पण न होकर समाज दर्पण है। आगे पढ़ें

4 वर्ष पहले

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