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Hindi Kavita: अटल बिहारी वाजपेयी की 2 चुनिंदा कविताएं

कविता
                
                                                         
                            चौराहे पर लुटता चीर, 
                                                                 
                            
प्यादे से पिट गया वज़ीर, 
चलूँ आख़िरी चाल कि बाज़ी छोड़ विरक्ति रचाऊँ मैं? 
राह कौन-सी जाऊँ मैं? 

सपना जन्मा और मर गया, 
मधु ऋतु में ही बाग़ झर गया, 
तिनके टूटे हुए बटोरूँ या नवसृष्टि सजाऊँ मैं? 
राह कौन-सी जाऊँ मैं? 

दो दिन मिले उधार में 
घाटों के व्यापार में 
क्षण-क्षण का हिसाब लूँ या निधि शेष लुटाऊँ मैं? 
राह कौन-सी जाऊँ मैं?  आगे पढ़ें

रोते-रोते रात सो गई 

एक वर्ष पहले

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