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प्यार के इस खेल में: मोहब्बत के रंगों से भरा इरा टाक का एक इंद्रधनुषी उपन्यास

era tak book pyar ke is khel mein review in hindi
                
                                                         
                            
यूं तो इश्क़ के कई रंग होते हैं लेकिन फिर भी उसे सुर्ख़ से ही जोड़ा जाता है, इस किताब की शुरुआत में ही लेखिका इरा टाक ने लिखा है कि वो सारे रंगों को मोहब्बत से जोड़ती हैं। ठीक अपने कहे की तरह ही लेखिका ने इस उपन्यास में प्रेम के तमाम रूपों को दिखाने की कोशिश की है। पहले प्रेम टोनी से से धोका खाती नायिका त्रिशा जो एक डॉक्टर भी है, जिसे उस विरह से निकलने में समय लगता है। उसके पीछे दीवानगी की हद तक पड़ा एक आशिक़ राहुल और एक शख्स और है - विक्रांत जो किसी और शहर में आईपीएस अफसर है लेकिन त्रिशा का शांति से, एक परिपक्वव प्रेमी की तरह की प्रेम करता है। वो प्रतीक्षा करता है लेकिन जुनूनी नहीं होता। लेकिन त्रिशा कोई अपरिपक्व लड़की नहीं है लेकिन भावनात्मक रूप से उलझी हुई है। इसके जीवन में आए तमाम रिश्ते उसी उलझन की प्रतिकृति हैं।

किताब आज के युवाओं को ख़ास पसंद आएगी, चूंकि उसमें वे सारे फ़ैक्टर हैं जो आज की सिचुएशनशिप और रिलेशनशिप में होते हैं। चाहें सोशल मीडिया पर एक्स की स्टॉकिंग हो या फिर चीट करने के बाद भी बिना ग्लानि के मूव ऑन कर जाना। कुछेक ग़लत रिश्तों के जूझने के बाद सही रिश्ते पर भी अविश्वास से भर जाना। लेकिन एक ऐसा व्यक्ति उसे मिलता है जो उसे जज नहीं करता, उसका दोस्त अधिक रहना चाहता है, भावनाएं काबू में रखता है लेकिन प्रेम की असल परिभाषा जानता है। दरअसल लेखिका ने उस पात्र के ज़रिए ही प्रेम का वास्तवित सूत्र पकड़ाने की कोशिश की है। फिर अंत में जीत तो उसी प्रेम की होती है जो प्रेम है, जिसमे प्रतीक्षा है, धैर्य है, जो परिपक्व है, जिसमें बदले में कोई चाहना नहीं है, सिर्फ़ एकतरफ़ा चाहत है। 

यह किताब प्रेम को किसी आदर्श या स्वप्नलोक की तरह नहीं, बल्कि एक ऐसे अनुभव की तरह देखती है जिसमें उम्मीद, भय, आत्मसम्मान और असुरक्षा, सब साथ-साथ चलते हैं। किताब की भाषा सरल और प्रवाहमयी है। यही वजह है कि यह बोझिल नहीं लगती, बल्कि पाठक को सहज रूप से अपने साथ बहा ले जाती है। प्रेम, दोस्ती, अकेलापन और आत्मसम्मान जैसे विषय आसानी से बयां हो जाते हैं। ख़ास तौर पर आज के कोरपोरेट ज़माने में। 

कुल मिलाकर, प्यार के इस खेल में उन पाठकों के लिए एक सधी हुई, संवेदनशील और आसानी से पढ़ी जाने वाली किताब है, जो रिश्तों की उलझनों, टूटते-जुड़ते भरोसे और प्रेम की वास्तविकताओं को समझना चाहते हैं। यह किताब याद दिलाती है कि प्यार कोई सीधा रास्ता नहीं, बल्कि ऐसा खेल है जिसमें पाने और खोने से ज़्यादा खुद को समझ पाना मायने रखता है।

किताब प्रभात प्रकाशन से आई है और इसका मूल्य 400 रुपये है। 
7 घंटे पहले

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